
what is shivlingam
जैसा कि आप सभी जानते हैं कि हिंदू धर्म में शिवलिंग की पूजा सभी मंदिरों और घरों में की जाती है। क्योंकि लिंगम भगवान शिव का ही रूप है। जिसे शिवलिंग कहते हैं। भगवान शिव देवों के देव महादेव हैं। जो अपने भक्तों पर जल्द ही प्रसन्न हो जाते हैं। भगवान शिव धरती पर शिवलिंग के रूप में सदैव विराजमान हैं।
भगवान शिव एकमात्र ऐसे देवता हैं। जिनकी पूजा लिंगम रूप में की जाती है।लिंगा का अर्थ है सृजन और निर्माण । शिवलिंग में संपूर्ण ब्रह्मांड की ऊर्जा समाहित है। जो संसार चक्र को बनाए रखता है। शिवलिंग शक्ति और ऊर्जा से मिलकर बना है प्रलयकाल में संपूर्ण सृष्टि जिसमे विलीन हो जाती है। और पुनः सृष्टिकाल में जिससे निर्मित होती है|उसे लिंगम कहते हैं।
शिवलिंगम का अर्थ

शून्य, आकाश, अनन्त, ब्रह्माण्ड और निराकार परमपुरुष का प्रतीक होने से इसे लिंग कहा गया है. स्कन्दपुराण में कहा है कि आकाश स्वयं लिंग है।शिवलिंग वातावरण सहित घूमती धरती तथा सारे अनन्त ब्रह्माण्ड ( क्योंकि, ब्रह्माण्ड गतिमान है ) का अक्स ही लिंग है.शिव लिंग का अर्थ अनन्त भी होता है अर्थात जिसका कोई अन्त है, नही शुरुवात।
लिंगम को शिव का निराकार रूप माना जाता है। जो पूरे ब्रह्मांड की ऊर्जा का प्रतीक है। और शिव और शक्ति के एकल रूप का प्रतिनिधित्व करता है। क्योंकि शिवलिंग शक्ति (पार्वती) और भगवान शिव का एकल रूप है। लिंगम, जो प्रकृति में नर और नारी की समानता को दर्शाता है, लिंगम को नर्मदेश्वर शिवलिंग के रूप में भी जाना जाता है क्योंकि यह नर्मदा के तल से निकलते है।